हा अभी कुछ बुन रही हूँ, अल्फाज़ो को अभी मैं चुन रही हूँ... अच्छी सच्ची, यादों के मैं वो पल सुन रही हूँ, कभी तुम बातो को जो यूँ ... हा , हम्म बोल, कह के खत्म करते हो बस वहीं , अधूरे से जज्बात समझ रही हूँ... तु जा.....ना ये वाक्यशैली ,वाक्यांश या ... यूं कहूँ की रिश्तों की बारहखड़ी समझ रही हूँ।।