खुदगर्ज़ सी हैं शायद , खुशनुमा भी होती , ए ज़िन्दगी तू बहुत छोटी हैं, ज़रा थोड़ी बड़ी भी होती , मेरे ज़ज़बात बयाँ कर पाती, अगर उसमे 2-4 साँसे ओर लिखी होती, खैर अब वक्त हैं जाने का , उससे कौन रोकेगा ....., मरने के बाद मेरे दिल को कौन देखेगा।। ******** #लवलीन यदुवंशी