खुदगर्ज़ सी हैं शायद ,
खुशनुमा भी होती ,
ए ज़िन्दगी तू बहुत छोटी हैं,
ज़रा थोड़ी बड़ी भी होती ,
मेरे ज़ज़बात बयाँ कर पाती,
अगर उसमे 2-4 साँसे ओर लिखी होती,
खैर अब वक्त हैं जाने का ,
उससे कौन रोकेगा .....,
मरने के बाद मेरे दिल को कौन देखेगा।।
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#लवलीन यदुवंशी
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#लवलीन यदुवंशी
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