कभी कभी सोचती हूं, तुम बट चुके हो बहुत से किरदारो में, घर,परिवार, बच्चे, दोस्त........! . . मैं कहाँ हूँ इन सारो मे, कभी कभी सोचती हूँ कि क्या मुझे मिलोगे तुम इसी दुनिया मे, या मेरा इंतज़ार मेरी आखरी साँसों तक होगा, जाओ जी लो जिंदगी अपनी शर्तो पर, कुछ सच्चे झूठे रिश्तों के साथ, मैं भी याद तो जरूर आऊँगी मरने के बाद! यकीन दिलाती हूँ , तुम याद करोगे ओर मैं दौड़ी आउंगी, रिश्ता ये अहसासों का तब भी निभाऊंगी, जब कभी तुम सोचोगे मेरे बारे में ..... मैं हवा बन तुम्हारे बाल सहलाऊंगी, कभी थके हुए होंगे तो तुम्हारे पमाने में रस बरसाउंगी, कभी नींद सी, कभी ठंडी रात सी नजर आउंगी , हा मैं तब भी तुमको चाहूँगी ।। लवलीन यदुवंशी 28.01.2024