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कभी कभी मेरे ख्यालों में ।

कभी कभी सोचती हूं,
तुम बट चुके हो बहुत से किरदारो में,
घर,परिवार, बच्चे, दोस्त........!
.
.
मैं कहाँ हूँ इन सारो मे,

कभी कभी सोचती हूँ कि
क्या मुझे मिलोगे तुम इसी दुनिया मे,
या मेरा इंतज़ार मेरी आखरी साँसों तक होगा,
जाओ जी लो जिंदगी अपनी शर्तो पर,
कुछ सच्चे झूठे रिश्तों के साथ,
मैं भी याद तो जरूर आऊँगी मरने के बाद!
यकीन दिलाती हूँ ,
तुम याद करोगे ओर मैं दौड़ी आउंगी,
रिश्ता ये अहसासों का तब भी निभाऊंगी,
जब कभी तुम सोचोगे मेरे बारे में .....
मैं हवा बन तुम्हारे बाल सहलाऊंगी,
कभी थके हुए होंगे तो तुम्हारे पमाने में रस बरसाउंगी,
कभी नींद सी, कभी ठंडी रात सी नजर आउंगी ,
हा मैं तब भी तुमको चाहूँगी ।।





लवलीन यदुवंशी
28.01.2024

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मै और मेरी कहानी

कभी लिखूँ खुद पर तो क्या लिखूँगी.. हज़ारो ख्वाइशे ऐसी जो चाही.... लेकिन पूरी ना हो पाई... कुछ सपने जो आँखों में रह गए , कुछ रास्ते जो मेरे कदमो में आकर मुड़ गए .., मेरे हिस्से का आसमां  जिसमे मैं उड़ सकूँ. लेकिन ज़िम्मेदारी की डोर ने कदमों क़ो बाँध दिया, मेरी भी ख्वाइशें थी बेवज़ह मुस्कुराने की, बिना डरे बेपरवाह उड़ जाने की... फिर हर बार खुद क़ो समझा लिया..., और दिल क़ो चुप करना सिखा लिया. कभी लिखूँगी " मै " क़ो... जो कही भीड़ में खो गई, जो हँसती तो हर रोज है, पर अंदर से थोड़ी 'रो' गई. कभी खुद क़ो लिख पाऊँ तो लिखूँगी.. अधूरी ज़िन्दगी की पूरी कहानी, जो मेरी ही थी... पर उसे पूरा ज़ी ना सकी...,     लवलीन  9may2026

क्या तुम जानते हों

दो जिस्म एक जान हैं हम, क्या तुम ये जानते हो, मैं दिन को कहूँ रात तो, क्या तुम ये मानते हो, उलझा देते हो सवालो में मुझे , क्या तुम ये जानते हो, रोज़ ख्वाइशें रहती थी आप से मिलने की  मेरे ज़ज्बातो के समंदर की गहराई , क्या तुम ये जानते हो , दो जिस्म एक जान हैं हम , क्या तुम जानते हो, रोज़ बहाने बना कर मुझे सताते हो, क्या तुम ये मानते हो।। लोग कहते हैं आदतें एक जैसी है हमारी , क्या तुम ये जानते हो, बहुत मन्नतो से पाया है ये हक्कीत क्या तुम ये जानते हो, मेरे पास तुम्हारे ना होने का दर्द  , क्या तुम ये जानते हो, दो जिस्म एक जान हैं हम, क्या तुम ये मानते  हो, दो जिस्म एक जान हैं हम .......................।। #लवलीन यदुवंशी

हमारा मिलन

तुम चाँद तो मैं सितारा बन गई, तुम रात तो मैं मिठी सुबह बन गई, तुम गहरा सागर तो मैं किनारा बन गई, तुम शाम तो मैं उजाला बन गई, तुम जो रोज़ यूँ मिलने की बात करते हो, तो.....? वो देखो..., वो देखो ना...., वो देखो दूर क्षितिज पर ..... कुछ ऐसा होगा हमारा मिलन.........!! #लवलीन यदुवंशी