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Showing posts from July, 2020

हमारा मिलन

तुम चाँद तो मैं सितारा बन गई, तुम रात तो मैं मिठी सुबह बन गई, तुम गहरा सागर तो मैं किनारा बन गई, तुम शाम तो मैं उजाला बन गई, तुम जो रोज़ यूँ मिलने की बात करते हो, तो.....? वो देखो..., वो देखो ना...., वो देखो दूर क्षितिज पर ..... कुछ ऐसा होगा हमारा मिलन.........!! #लवलीन यदुवंशी

काश

खुशियों की कीमत अदा करते करते हम कब खुद से जुदा हो गए इसका हमे पता ना चला, वो आए हमारी मयत - ए - महफ़िल में ये हमे पता ना चला, जब तक जिंदा हैं निभा लो रिश्तों को , मेरी खुशियों में शामिल होके , हम कब कर जाए दुनिया को अलविदा ,  ये ना तुम्हे पता ना हमे पता, काश वो एक बार झुठा ही सही पूछ तो लेता मेरा हाल, काश की हमे यूँ उनका इंतजार ना होता, तुम्हे मुस्कुराता चेहरा पसन्द हैं हमारा , लेकिन दुख भी तुम ही देते हों ये तुम्हे पता ना चला, तुम मेरी हो सिर्फ मेरी हो ये कहते रहते थे, तुम खुद कब किसी और के हो गए हमे पता ना चला, काश.......! काश .......! काश की तुम मिल लेते मेरे ज़नाज़े से पहले..…? काश की ये जन्म हमे दोबारा ................? #लवलीन यदुवंशी

गीत गज़ल बनाके तुझे

गीत ग़ज़ल बना के तुझे मैं, यूँ बरसों बरस गाती रही..., होंठ सिले थे कुछ गिले थे, फिर भी यूँही मुस्कुराती रही..., और तेरी विरह की वेदना को दूसरों से छिपाती रही...., जब कभी आंखे नम हुई ..........तो ...? देख के हसीन बादलों को अपने गम भी बहाती रही ...., क्या बताऊँ तुझको कितना अकेली थी वहा..? जहाँ से देख के तुझको मैं अपने घर को जाती रही......, क्या पता तुझको मै अपनी हर साँस में तुम्हें बुलाती रही...... गीत ग़ज़लों को बनाके यूँही उम्र भर गुनगुनाती रही......!! याद हैं मुझे आज भी शाम का मंजर ओर तेज ठंड, वो मेरी गली में तेरा आना मुझे बुलाना और चुप रहकर तेरा सब कुछ कह जाना .......? तुझे यक़ीन दिलाने को मै शब्द रचती नही , हो जिनके मन मे अंधेरा उनको लौ प्यार की दिखती नही , क्या पता तुझको मै अपनी हर साँस में तुम्हे कितना रटती रही...... गीत ग़ज़लों को बनाके यूँ ही बरसों बरस गाती  रही......!! #लवलीन यदुवंशी

मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं

भूला के दुनिया के रंजोग़म मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं , हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं, छोड़ के झूठे रिश्तों और नातेदारों को मैने खुद से रिवायत कर ली हैं......, हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं, इंतज़ार में जिसके हमने बर्षो गवां दिए देख के उस ज़ालिम को हमने ......? हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं, बहुत गुमान था हमे उनपे....? अभी फिर से बगावत कर ली हैं, हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं , साथ तुम्हारा एक सपना था मैने जख्मों से मोहब्बत कर ली हैं, हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं, बहुत हो गया सुनना - सुनाना अपने जज्बातों से मोहब्बत कर ली हैं, हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं..., अब दूर ही रहना पास ना आना अब हमने खुद से मोहब्बत कर ली है, हा मैने खुद से मोहब्बत कर ली हैं।। #लवलीन यदुवंशी