खुशियों की कीमत अदा करते करते हम कब खुद से जुदा हो गए इसका हमे पता ना चला, वो आए हमारी मयत - ए - महफ़िल में ये हमे पता ना चला, जब तक जिंदा हैं निभा लो रिश्तों को , मेरी खुशियों में शामिल होके , हम कब कर जाए दुनिया को अलविदा , ये ना तुम्हे पता ना हमे पता, काश वो एक बार झुठा ही सही पूछ तो लेता मेरा हाल, काश की हमे यूँ उनका इंतजार ना होता, तुम्हे मुस्कुराता चेहरा पसन्द हैं हमारा , लेकिन दुख भी तुम ही देते हों ये तुम्हे पता ना चला, तुम मेरी हो सिर्फ मेरी हो ये कहते रहते थे, तुम खुद कब किसी और के हो गए हमे पता ना चला, काश.......! काश .......! काश की तुम मिल लेते मेरे ज़नाज़े से पहले..…? काश की ये जन्म हमे दोबारा ................? #लवलीन यदुवंशी