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Showing posts from July, 2019

सावन

                                      सावन              🌼🌼🌿🌿🌾🌾🌿🌿🌼🌼 यूँ तो सावन हर साल आता हैं, ये रंग प्यार का हर ओर भर जाता हैं। प्रियतम की आश में बैठे हुए लोगो को, एक प्यार भरा संदेश सुना जाता है, साजन के लिए आँखो में इतंज़ार , दिल मे प्यार बेशुमार आ जाता हैं। यूँ तो सावन हर साल आता हैं, ये रंग प्यार का हर ओर भर जाता है। चारो तरफ खुशियां ही खुशियाँ हैं, हरे भरे पेड़ .... लहराती फैसले, वो तीज़ के गीत वो बारिश की फ़ुहार, फिर से अपनो पे प्यार आ जाता है। यूँ तो सावन हर साल आता हैं, ये रंग प्यार का हर ओर भर जाता हैं। मैं भी बैठी हूँ साजन के इंतजार में, हरी चूड़ियाँ, लाल बिंदियां माथे पे श्रंगार हैं, तरस रही हैं आँखे बारिश की तरह , लौट के आ जाओ बस ओर नही अब चैन हैं।              🌼🌼🌿🌿🌾🌾🌿🌿🌼🌼     #लवलीन यदुवंशी

अधूरी प्रीत

                        अधूरी प्रीत                      ---------------------      दीपक  इस कहानी का मुख्य किरदार है ।  दीपक एक पढ़ा लिखा समझदार लड़का है घर मे माता पिता ओर तीन बहने है , तीनों बहनों की शादी शुदा ज़िन्दगी अच्छे से गुजर रही हैं , दीपक सबसे छोटा और बस एक अच्छी सरकारी नोकरी की तलाश में  2 बार सरकारी नोकरी छोड़ कर अब दिल्ली में account officer की  जॉब कर रहा है ।         घर परिवार में सब दीपक के पीछे पड़े रहते है , की भाई तू शादी करने की हा कर दे  लेकिन दीपक है की उसको अभी और अच्छी नोकरी की तलाश हैं। वह दिन रात अपने सपने पूरे करने में लगा रहता था । घरवालों ने उसके बार बार मना करने पे पूछ भी लिया कि क्या तुमको कोई और लड़की पसन्द है ,तो तुम बता दो हम तुम्हारी शादी उसी लड़की से करवा देंगें। लेकिन दीपक का ध्यान तो आज तक पढ़ाई के अलावा कही गया ही नही। अब दीपक ने अपने माता पिता के नज़रिए से देखा तो समझा ...

यादें

    चमक सितारों की आज फ़ीकी पड़ने वाली हैं,     क्योकि.............,    महबूब मेरे की आज डोली सजने वाली हैं ।      उसने ये नगमा पढ़ा ही था कि...? जज्बातों का ऐसा सलाब उठा कि...?       रोशन मेरे जहाँ को बर्बाद कर गया...। खुशियाँ आज भी मेरे जीवन मे दिए कि लौ की तरह हैं, और ग़म हैं कि तूफ़ान की तरह थमने का नाम नहीं। आज भी महक हैं जीवन मे उस पल की उस ख़ुशी की। जिसने दिल को धड़कना सिखाया, मुझे उड़ना सिखाया । टूट चुकी थी लेकिन सम्भलना सिखाया ।    आज एक नग़मा उनके लिए मैं भी लिखना चाहती हूँ। चमक सितारों की भले ही फ़ीकी पड़ जाए, तुम अपनी कोशिश न छोड़ना ..............., मैं छोड़ भी जाऊँ दुनिया को, तुम मेरे दिल का घरौंदा न छोड़ना। मैं आज भी याद करके तुम्हें ,  अपने आप मे सिमट जाती हूँ, मेरी हर दुआवों में शामिल  तुम्हें रखती हूं। अब चमक सितारों की भले ही फीकी पड़ जाए, ज़िन्दगी जो तुम्हारी रोशन हैं , उसकी चमक ना फिक्की पड़ने पाए,। : अब हाल -ए दिल और कहा ना जाए, तुम समझ सको इस दिल को तो...., मेरा लिखना सफल ...

शादी और समझ -2

आज मैं आपको जो बताने जा रही हूँ , वो एक सच्ची कहानी हैं , इन के साथ मेरा असल ज़िन्दगी में क्या रिश्ता हैं ये बताना शायद उचित नही होगा।। एक लड़की जो अपने घर मे खूब लालन पालन से बड़ी होती हैं , फिर वह किसी गरीब के घर की बेटी हो या किसी अमीर के घर की बेटियां तो बेटिया होती हैं । ऐसी ही एक लड़की जो अपने पापा की परी ओर मम्मी की लाडली थी और जो एक साधारण से परिवार में पली बड़ी हुई पिता फ़ौज़ में थे और माँ एक ग्रहणी थी , जिनका अपने बच्चों पर हर वक़्त ध्यान होता था , उनकी पढ़ाई से लेकर खेल कूद तक । माता पिता दोनों ने अपने बच्चों को पढाई के साथ साथ घर के काम समाज के तौर तरीके सब कुछ समय समय पर बताते रहते थे । बच्चे भी समझदार थे ना ही गली मोहहले में बल्कि पूरे गांव के लोग बच्चों की तारीफ करते नही थकते थे।  फिर एक दिन इनके पिता की असमय मृतु हो जाने के बाद , रिश्तेदारो के दबाव में आके माँ ने अपनी दोनो बड़ी बेटियों की शादी कर दी । एक लड़की अच्छे ससुराल में थी , ओर दूसरी एक ऐसे परिवार में जिसके पति ने शादी के बाद अपनी नोकरी भी छोड़ दी और घर मे अपनी ही बड़ी भाभी के साथ अवैध संबंध बनाऐ हुए थे तो ज्यादा...

शादी और समझ

                        शादी और समझ       आज समाज मे आये दिन एक नई कहानी सुनने को मिलती हैं, ओर इनमे से एक हैं शादीयां टूटना  इसका जिम्मेदार कौन हैं क्या आप लोगो ने सोचा है कभी इस बारे में  .......... ?        हम अपने बच्चो को पढ़ा लिखा रहे हैं , उनको कामयाब भी बना रहे हैं फिर चाहे वो लड़की हो या लड़का सबकी एक समान परवरिश कर रहे हैं , जो कि हमारे समाज के लिए गर्व की बात है, फिर पढ़ाई के साथ साथ हम अपने बच्चो को एक सभ्य समाज मे रहने के तौर तरीके सीखना क्यों भूल जाते हैं । क्या ये हमारी जिम्मेदारी नही बनती अपने बच्चों के प्रति की हम समय समय पर उनको अच्छे बुरे के बारे में बताए।         हम अपने बच्चो को क्यू नही समझाते रिश्तों की अहमियत को ,क्यों हम उन्हें रिश्तों को सही ढंग से चलाने के बारे में बताते , हम क्यों भूल जाते है इस बात को की आने वाले कल की परवरिश हम आज कर रहे हैं, आज हम जैसी शिक्षा और सीख अपने बच्चो को देंगे कल को वो उसी शिक्षा के ज़रिए अपने जीवन मे सही ...