चमक सितारों की आज फ़ीकी पड़ने वाली हैं,
क्योकि.............,
महबूब मेरे की आज डोली सजने वाली हैं ।
उसने ये नगमा पढ़ा ही था कि...? जज्बातों का ऐसा सलाब उठा कि...?
रोशन मेरे जहाँ को बर्बाद कर गया...।
खुशियाँ आज भी मेरे जीवन मे दिए कि लौ की तरह हैं, और ग़म हैं कि तूफ़ान की तरह थमने का नाम नहीं। आज भी महक हैं जीवन मे उस पल की उस ख़ुशी की। जिसने दिल को धड़कना सिखाया, मुझे उड़ना सिखाया । टूट चुकी थी लेकिन सम्भलना सिखाया ।
आज एक नग़मा उनके लिए मैं भी लिखना चाहती हूँ।
चमक सितारों की भले ही फ़ीकी पड़ जाए,
तुम अपनी कोशिश न छोड़ना ...............,
मैं छोड़ भी जाऊँ दुनिया को,
तुम मेरे दिल का घरौंदा न छोड़ना।
मैं आज भी याद करके तुम्हें ,
अपने आप मे सिमट जाती हूँ,
मेरी हर दुआवों में शामिल तुम्हें रखती हूं।
अब चमक सितारों की भले ही फीकी पड़ जाए,
ज़िन्दगी जो तुम्हारी रोशन हैं ,
उसकी चमक ना फिक्की पड़ने पाए,।
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अब हाल -ए दिल और कहा ना जाए,
तुम समझ सको इस दिल को तो....,
मेरा लिखना सफल हो जाए.....।।
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#लवलीन यदुवंशी

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