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Showing posts from April, 2022
आज आप लोगो को एक कहानी सुनाती हूँ, जब कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद सारे पांडव भाइयों ने अपना अपना राज्य संभाल लिया ओर काफी लंबे समय तक राज्य पालन के बाद जब वे लोग अपने जीवन की अन्तिम घड़ी की ओर प्रस्थान कर रहे थे तब उन्होंने सोचा हम अपना देह त्याग हिमालय की गोद मे करेंगे तो पांचों पाण्डव निकल लिये साथ मे द्रौपदी भी थी .जब वो सारे बर्फ़ पे चलते जा रहे थे तो द्रौपदी का पैर बर्फ के घने गहरे गढ्डे में चला जाता है तो वह आवाज लगाती है कि मुझे यहाँ से निकलने में मेरी मदद करो . लेकिन युधिष्ठिर अपने सभी भाइयों को पीछे मुड़ के देखने से भी मना कर देता है , अब द्रौपदी सोचती हैं की मैने सारी ज़िंदगी इनकी सेवा करने , इनको इकट्ठा रखने और अब अंत समय मे भी इन्ही के साथ देह त्याग करने तक का सफ़र इनलोगो के इर्द गिर्द बिता दिया आज ये लोग मेरे जीवन के आखिरी समय मे मेरा साथ देने से मना कर रहे हैं , मना किया वो ठीक है किंतु पीछे मुड़ कर भी नही देख रहे ....., अब द्रोपदी जी को अपने वासुदेव याद आते हैं.... ओर वह आंखे बंद करके दोनों हाथों को जोड़ कर एक बार फिर से वासुदेव को याद करती हैं, जैसे ही भगवान श्री कृष्ण उनके सामने...

घड़ी अंतिम

देखो ना सब आस पास है तुम नही, मेरी आँखें सिर्फ तुम्हें ढूढ रही हैं, कहा हो तुम......, जन्म लेने के बाद हम भूल जाते हैं , घड़ी अंतिम भी आएगी एक दिन.., माँ, पापा, भाई, बहन यही हैं, रिश्ते, नाते ,प्यार ,परिवार, सब हैं तुम नही, कहा हो तुम .........., अभी छोड़ो नाराजगी यूं कब तक नाराज रहोगे, देखो मेरी अंतिम घड़ी है मुस्कुराकर विदा करोगे, बहुत सताया तुमने बस अब ओर नही , जातीं हूँ अब देर और नही, रोना मत तुम , ना ही कोसना अपने आप को, ज़िद्दी बहुत हूँ मैं बिल्कुल तुम्हारी तरह, रास्ता आसान नही मुश्किल वाला चुनती हूँ...., मेरी याद में पिहाऊ नही , कमरा नही, बस एक खिलते गुलाब का पोधा लगाना, लगाओगे ना .........? जब जब पास से गुजरोगे तो मेरी खुशबु तुम्हें याद दिलाएंगी, ओर अगर कांटा लग जाये कोई तो समझ लेना नाराज हूँ मैं, तुमसे ...., आज भी...., पहले की तरह ...., अच्छा सुनो माफ करना .............."मुझे" अच्छा अब चलती हूँ जाने का समय आ गया हैं...., हे......? ऐसे नही मुस्कुराते हुए विदा करो..........अंतिम घड़ी। #लवलीन यदुवंशी 20.4.2022

फिर से मोहब्बत

कुछ तो जरूर है तेरे मेरे दरमियाँ, वरना यूँ ही दिल बेचैन ना होता, ना तुम चुप होते ना मैं चुप होती, ओर ना कोई बेताब होता, दिमाग की सुनी बहुत, अब दिल की सुनके देखते हैं, आओ अब पास मेरे फिर से, मोहब्बत करके देखते हैं....। ना मैं अनजान हूँ, ना तुम हँसी इस रात से, आजाओ पास मेरे तुम्हे बाहों में भर के देखती हूँ। हा......., फिर से मोहब्बत करके देखती हूँ...., एक बार फिर से मोहब्बत करके देखती हूँ।। लवलीन यदुवंशी 21फरवरी 2022

इश्क़ चालीस का

इश्क़ चालीस का कुछ नया सा , कभी खुशबु से भरा सा , कभी खट्टी मीठी यादों सा, कभी धूप सा  कभी छाँव सा, कभी तेरे विरह की पीड़ा सा, कभी मिलने की खुशी सा, इश्क़ चालीस का कुछ नया सा , कभी तुम्हें ना पाने का गम सा, कभी तुम्हें फिर से पा लेने की खुशी सा, कभी तुम्हारे गुस्सा सा, कभी मुस्कुराहट सा , कभी अपना सा, कभी पराया सा, इश्क़ चालीस का कुछ नया सा , कभी तुम्हारे नाम सा, कभी बे बुनियाद सा, कभी चुलबुला सा, कभी पानी का बुलबुला सा, कभी याद सा , कभी फरियाद सा इश्क़ चालीस का कुछ नया सा, कभी उमंग सा, कभी तरंग सा, कभी झील सा, कभी आवेग सा, कभी निर्मल सा, कभी पावन सा, इश्क़ चालीस का कुछ नया सा , कभी अदब सा, कभी बेशर्म सा, कभी मासूम सा, कभी बालों की सफेदी सा, कभी तुम सा कभी मुझ सा, इश्क़ चालीस का कुछ नया सा...! इश्क़ चालीस का सिरफिरा सा..! #लवलीन यदुवंशी  8 अप्रैल 2022

अनदेखा इश्क़

ना देखा ना छुआ तुम्हे, ना बातें की ना पाया तुम्हे, ना जाना ना पहचाना तुम्हे, फिर कैसे हम तुम्हारे हो गए! ना मिले ना कोई इशारा किया, फिर भी मोहब्बत का सज़दा किया, ना कभी याद किया तुम्हें, ना कभी भुला पाए तुम्हे , फिर भी इश्क़ की हर सज़ा पाई हमने, गौरतलब होता हैं इश्क़ मुक्कमल नही होता इस जहाँ में ...... ओर वही पाया हैं हमने.... अधूरा इश्क़. लवलीन यदुवंशी 19.08.2023

वहम

एक वहम पाल रखा था मैने , उसके नाम का......., आज यक़ीन हुआ भी तो कैसे, उसके शब्दों में बेईमानी की .... बूं झलक रही थी......, मेरे लिखे जज्बातों को बकवास ....   बता कर ...? #लवलीन यदुवंशी

वादा

हाँ.. आऊँगी ना  एक दिन एक दिन के लिए तुम्हारे पास अपनी  तमाम उलझनों को  उलझा कर कहीं सिर्फ़ तुमसे मिलने और  ले आऊँगी स्वेटर जिसे बुना है मैंने तुम्हारी यादों के गर्म ऊन से किसी ऐसी ही  सर्द रात के लिए… #लवलीन यदुवंशी

वक़्त

थोड़े से वक्त में बहुत सारा जी लेना चाहती हूँ तुम्हें अपनी बेतुकी सी बातों में उलझा के बहुत सारा सुन लेना चाहती हूँ तुम्हें कम से वक्त में बने इस गाढ़े से बेनाम रिश्ते की बहुत सारी यादें समेट लेना चाहती हूँ फिर बुनूँगी एक स्वेटर इन गर्म सी यादों के ऊन से ठंडे उदासीन दिनों के लिए!... #लवलीन यदुवंशी