देखो ना सब आस पास है तुम नही,
मेरी आँखें सिर्फ तुम्हें ढूढ रही हैं,
कहा हो तुम......,
जन्म लेने के बाद हम भूल जाते हैं ,
घड़ी अंतिम भी आएगी एक दिन..,
माँ, पापा, भाई, बहन यही हैं,
रिश्ते, नाते ,प्यार ,परिवार, सब हैं तुम नही,
कहा हो तुम ..........,
अभी छोड़ो नाराजगी यूं कब तक नाराज रहोगे,
देखो मेरी अंतिम घड़ी है मुस्कुराकर विदा करोगे,
बहुत सताया तुमने बस अब ओर नही ,
जातीं हूँ अब देर और नही,
रोना मत तुम ,
ना ही कोसना अपने आप को,
ज़िद्दी बहुत हूँ मैं बिल्कुल तुम्हारी तरह,
रास्ता आसान नही मुश्किल वाला चुनती हूँ....,
मेरी याद में पिहाऊ नही , कमरा नही,
बस एक खिलते गुलाब का पोधा लगाना,
लगाओगे ना .........?
जब जब पास से गुजरोगे तो मेरी खुशबु तुम्हें याद दिलाएंगी,
ओर अगर कांटा लग जाये कोई तो समझ लेना नाराज हूँ मैं,
तुमसे ....,
आज भी....,
पहले की तरह ....,
अच्छा सुनो माफ करना .............."मुझे"
अच्छा अब चलती हूँ जाने का समय आ गया हैं....,
हे......?
ऐसे नही मुस्कुराते हुए विदा करो..........अंतिम घड़ी।
#लवलीन यदुवंशी
20.4.2022
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