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अनदेखा इश्क़

ना देखा ना छुआ तुम्हे,
ना बातें की ना पाया तुम्हे,
ना जाना ना पहचाना तुम्हे,
फिर कैसे हम तुम्हारे हो गए!
ना मिले ना कोई इशारा किया,
फिर भी मोहब्बत का सज़दा किया,
ना कभी याद किया तुम्हें,
ना कभी भुला पाए तुम्हे ,
फिर भी इश्क़ की हर सज़ा पाई हमने,
गौरतलब होता हैं इश्क़ मुक्कमल नही होता
इस जहाँ में ......
ओर वही पाया हैं हमने.... अधूरा इश्क़.



लवलीन यदुवंशी



19.08.2023

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कभी लिखूँ खुद पर तो क्या लिखूँगी.. हज़ारो ख्वाइशे ऐसी जो चाही.... लेकिन पूरी ना हो पाई... कुछ सपने जो आँखों में रह गए , कुछ रास्ते जो मेरे कदमो में आकर मुड़ गए .., मेरे हिस्से का आसमां  जिसमे मैं उड़ सकूँ. लेकिन ज़िम्मेदारी की डोर ने कदमों क़ो बाँध दिया, मेरी भी ख्वाइशें थी बेवज़ह मुस्कुराने की, बिना डरे बेपरवाह उड़ जाने की... फिर हर बार खुद क़ो समझा लिया..., और दिल क़ो चुप करना सिखा लिया. कभी लिखूँगी " मै " क़ो... जो कही भीड़ में खो गई, जो हँसती तो हर रोज है, पर अंदर से थोड़ी 'रो' गई. कभी खुद क़ो लिख पाऊँ तो लिखूँगी.. अधूरी ज़िन्दगी की पूरी कहानी, जो मेरी ही थी... पर उसे पूरा ज़ी ना सकी...,     लवलीन  9may2026

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