ना देखा ना छुआ तुम्हे,
ना बातें की ना पाया तुम्हे,
ना जाना ना पहचाना तुम्हे,
फिर कैसे हम तुम्हारे हो गए!
ना मिले ना कोई इशारा किया,
फिर भी मोहब्बत का सज़दा किया,
ना कभी याद किया तुम्हें,
ना कभी भुला पाए तुम्हे ,
फिर भी इश्क़ की हर सज़ा पाई हमने,
गौरतलब होता हैं इश्क़ मुक्कमल नही होता
इस जहाँ में ......
ना बातें की ना पाया तुम्हे,
ना जाना ना पहचाना तुम्हे,
फिर कैसे हम तुम्हारे हो गए!
ना मिले ना कोई इशारा किया,
फिर भी मोहब्बत का सज़दा किया,
ना कभी याद किया तुम्हें,
ना कभी भुला पाए तुम्हे ,
फिर भी इश्क़ की हर सज़ा पाई हमने,
गौरतलब होता हैं इश्क़ मुक्कमल नही होता
इस जहाँ में ......
ओर वही पाया हैं हमने.... अधूरा इश्क़.
लवलीन यदुवंशी
19.08.2023
19.08.2023
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