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शादी और समझ -2



आज मैं आपको जो बताने जा रही हूँ , वो एक सच्ची कहानी हैं , इन के साथ मेरा असल ज़िन्दगी में क्या रिश्ता हैं ये बताना शायद उचित नही होगा।।

एक लड़की जो अपने घर मे खूब लालन पालन से बड़ी होती हैं , फिर वह किसी गरीब के घर की बेटी हो या किसी अमीर के घर की बेटियां तो बेटिया होती हैं । ऐसी ही एक लड़की जो अपने पापा की परी ओर मम्मी की लाडली थी और जो एक साधारण से परिवार में पली बड़ी हुई पिता फ़ौज़ में थे और माँ एक ग्रहणी थी , जिनका अपने बच्चों पर हर वक़्त ध्यान होता था , उनकी पढ़ाई से लेकर खेल कूद तक । माता पिता दोनों ने अपने बच्चों को पढाई के साथ साथ घर के काम समाज के तौर तरीके सब कुछ समय समय पर बताते रहते थे । बच्चे भी समझदार थे ना ही गली मोहहले में बल्कि पूरे गांव के लोग बच्चों की तारीफ करते नही थकते थे।

 फिर एक दिन इनके पिता की असमय मृतु हो जाने के बाद , रिश्तेदारो के दबाव में आके माँ ने अपनी दोनो बड़ी बेटियों की शादी कर दी । एक लड़की अच्छे ससुराल में थी , ओर दूसरी एक ऐसे परिवार में जिसके पति ने शादी के बाद अपनी नोकरी भी छोड़ दी और घर मे अपनी ही बड़ी भाभी के साथ अवैध संबंध बनाऐ हुए थे तो ज्यादा समय अपनी भाभी के साथ ही बिताता था । एक दिन परी ने अपने पति को उसकी भाभी के साथ उसी के बिस्तर पर देख लिया । तब तक परी की शादी को सिर्फ 20 दिन ही हुए थे , माँ ने दहेज़ की मांग को पूरा करके लड़की की शादी की थी।
अब परी अपने अंदर चल रही परेशानी का ज़िक्र करे तो किस से करे पिता का साँया तो सिर से पहले ही उठ चुका था , उपर से माँ के कंधो पे दहेज़ का कर्जा।
धीरे धीरे समय जैसे जैसे बित रहा था । ससुराल वाले परी को परेशान करने लगे, उसको मारते पीटते घर मे जानवरों की तरह बर्ताव करते।

परी बेचारी माँ की तरफ़ से सोच कर सब कुछ सहती रही , फिर एक दिन परी को जान से मारने की कोशिश की गई , उसकी कलाई की नश काट दी और परी के शरीर से बहुत खून बह गया , तभी अचानक कुछ दिनों बाद उसके घर उसका भाई गया किसी त्यौहार की मिठाई लेके , उसने देखा उसकी बहन की हालत तो ये हो रही है जैसे वो मरने वाली हैं , जबकि बाकी घर वाले बहुत खुशी से रह रहे हैं।

   तब भाई ने अपनी बहन की हालत देखकर परी की ससुरालवालों से बात करके अपनी बहन को अपने घर कुछ दिनों के लिए ले आया। एक हस्ती खेलती परी कैसे चुप शांत हो गई घर मे सभी लोग इस बदलाव को ओर उसकीं हालत को देखकर परेशान हो गए । परी से कुछ पूछे तो वो कुछ बताये ना फिर भाई ने अपनी बहन को अपने रिश्ते का वास्ता देकर बहन से सारी बात पूछी बहन ने भी अपना दिल खोलकर सारी बात बता दी और खूब दहाड़ मार मार कर रोने लगी ।
      जब मायके वालों को ये सब बातें पता चली की उनकी बेटी इतनी परेशान थी पिछले 6 महीनों से तो उन्होंने घर के ओर रिस्तेदारों में जो भी बड़ा और समझदार इंसान था उनको परी की ससुराल भेजा । उन लोगो से बात की उनको समझाया ओर परी एक बार फिर अपने ससुराल चली गई , क्योकि आज से 10 साल पहले गांव में शादी टूटना बहुत बाद कि बात होती थी । पहले जैसे तैसे करके बस लड़की को रिश्ता निभाने की ही सलाह दी जाती थी । लेकिन ये शिलशिला यहा नही रुका 5 साल तक परी वो सब सहती रही । 5 साल बाद जब परी का भाई बड़ा हुआ तो उसने अपने जीजा जी को बोला मेरी बहन इस घर मे नही रहेगी , अगर आपको रिश्ता निभाना है तो आप इस घर को छोड़ कर कही भी बहार रहो ... ओर वो वक़्त परी के जीवन मे एक नया मोड़ लेकर आया ।

    क्योकि परी को ससुराल में तो पति का सुख या अपने वैयवाहीक जीवन का सुख तो मिला ही नही था।परी जब कुछ दिन पति के साथ रही तो उसको पता कि वो माँ बनने वाली हैं , जब कोई लड़की माँ बनने की खुशी महसूस करती हैं तो अपने सारे दुख भूल जाती है , परी के साथ भी ऐसा ही हुआ वह गैर सहकारी स्कूल में जाति थी और घर मे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी । लेकिन खुश थी अपने होने वाले बच्चे के बारे में ही सोचती रहती , ये वक़्त भी ऐसा नही था की पति ने प्यार दिया हो वो अपनी प्रकति नही भूले थे , वो परी को उस हालत में भी मारता पीटता था । लेकिन अब परी को सिर्फ अपने बच्चे के पैदा होने का इंतजार था ।
  फिर जब एक दिन परी को बच्चा होने वाला था तो उसने अपने पति को घर  बुलाया तो वो अपनी उसी भाभी को साथ लेकर घरआया परी को डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय उसे ससुराल ले गया , ओर वहा अपने घर पे यानी कि परी की ससुराल में ही छोड़ दिया । परी ससुराल में बार बार सबको बोलती रही कि मुझे तकलीफ हो। रही ह डॉक्टर के पास लेके चलो लेकिन किसी ने एक न सुनी ऐसे करते करते 20 दिन बीत गए फिर परी ने अपनी हालत  अपनी माँ को बताई , जो उसको अस्पताल लेके गई ,डॉक्टर परी की हालत देख कर ही उसका इलाज करने की मना कर देते इसी तरह कई हॉस्पिटल में जाने के बाद किसी जानपहचान वाली महिला डॉ. के पास दाखिल करवाया।  ऑपरेशन से बेटा तो हुआ लेकिन वो जीवन और मृतु के बीच झुंझ रहा था । ऑपरेशन के बाद परी कॉमा में चली गई बच्चा मर गया । ससुराल वाले परी को हॉस्पिटल में ही छोड़ कर चले गए , परी ज़िंदा है मर गई ,कोई खैर खबर कभी नही ली। परी 3 महीने में ठीक हो गई लेकिन अंदर ही अंदर घुट रही थी कि मेरी तो ससुराल में कभी कद्र नही हुई। लेकिन उन लोगो ने तो अपने खुद के बच्चे के लिए भी 2 आँसु न बहाये।

समय बीतता गया , परी को ना कोई ससुराल से मिलने आये न पूछने आये , परी फोन करे तो कोई बात न करे,। फिर परी ने फैसला किया कि अब बस ओर नही । परी ने तलाक की अर्जी दी 2 साल लग गए , तलाक होने में ।

वर्तमान:-
  आज परी ख़ुश हैं क्योंकि उसका हाथ एक ऐसे इंसान ने थामा हैं जो हर तरीक़े से एक अच्छा पढा लिखा और अच्छे परिवार से है ,जिसको शादी जैसे पवित्र रिश्ते को निभाने की समझ है, ओर जो परी को समझता है उसको मान सम्मान के साथ खूब प्यार से रखता हैं।  आज परी अपने जीवन मे खुश है , लेकिन पिछले 10 साल की भरपाई करना मुशकिल हैं परी के लिए।

 अंत मे इतना लिखूंगी की एक रिश्ते में जुड़ने से पहले उसको समझने की हर मुमकिन कोशिश करना जरूरी है ...... क्योकि रिश्ते बनाना नही निभाना आना जरूरी हैं ।
       
                        *************
         ( फिर किसी सच्ची कहानी के साथ आऊँगी)
                             धन्यवाद।

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