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एक शख्स

एक शख्स मुझे ऐसे नजर आता हैं,
जैसे अंधेरे कमरे में रोशनदान नजर आता हैं,
वो दूर भले ही है मुझ से,
लेकिन मेरे हर किरदार में नजर आता है,
झलक उसकी मेरी आँखों मे दिखती है,
वो ये जान के भी अनजान बना बैठा है,
झूठी रिवायतें दुनिया की ,मैं भी जानती हूँ,
फिर क्यों वही चेहरा मुझे ,
हर जगह नज़र आता हैं,
उसकी यादों के किस्सों की ,
हमने कहानिया बना ली है,
अब तो हर रोज उस कहनी को 
पढ के ही चैन आता हैं....।।

#लवलीन यदुवंशी
25.10.2020

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