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गीत गज़ल बनाके तुझे



गीत ग़ज़ल बना के तुझे मैं, यूँ बरसों बरस गाती रही...,

होंठ सिले थे कुछ गिले थे, फिर भी यूँही मुस्कुराती रही...,
और तेरी विरह की वेदना को दूसरों से छिपाती रही....,
जब कभी आंखे नम हुई ..........तो ...?
देख के हसीन बादलों को अपने गम भी बहाती रही ....,
क्या बताऊँ तुझको कितना अकेली थी वहा..?
जहाँ से देख के तुझको मैं अपने घर को जाती रही......,


क्या पता तुझको मै अपनी हर साँस में तुम्हें बुलाती रही......

गीत ग़ज़लों को बनाके यूँही उम्र भर गुनगुनाती रही......!!

याद हैं मुझे आज भी शाम का मंजर ओर तेज ठंड,

वो मेरी गली में तेरा आना मुझे बुलाना
और चुप रहकर तेरा सब कुछ कह जाना .......?
तुझे यक़ीन दिलाने को मै शब्द रचती नही ,
हो जिनके मन मे अंधेरा उनको लौ प्यार की दिखती नही ,

क्या पता तुझको मै अपनी हर साँस में तुम्हे कितना रटती रही......

गीत ग़ज़लों को बनाके यूँ ही बरसों बरस गाती  रही......!!




#लवलीन यदुवंशी







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