तेरे इंतज़ार का सफ़र अधूरा रह गया,
मेरे ज़ज्बातो का शिलशिला अधूरा रह गया,
दशको बीत गए तेरे इंतज़ार में ......,
उन सालों का हिसाब अधूरा रह गया।
जिन का मिलना किस्मत में था..?
उनका साथ अधूरा रह गया ......।
सोचा था बहुत बातें होंगी तुझसे मिलके,
उन बातों का किस्सा अधूरा रह गया,
चाँद तो पूरा था गगन में उस दिन भी ,
फिर न जाने क्यों हमारा साथ अधूरा रह गया।
आओ कहीं कोई आशियाना ढूंडते हैं,
अपने सपनों का दूर कहीं एक घर सजाते हैं।
तुम वहा से रोज़ रोज़ मुझे याद करना,
ओर मैं फिर से ........... नई कोई यादें सज़ा लूँगी।
तेरे इंतज़ार का सफ़र अधूरा रह गया,
मेरे ज़ज्बातो का शिलशिला अधूरा रह गया,।।
# लवलीन यदुवंशी

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