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लड़खपन



सपने सुहाने लड़खपन के,सपने सुहाने मेरे बचपन के
अब याद आते हैं बहुत, तड़पाते हैं बहुत।
सपने सुहाने मेरे अल्हड़पन के याद आते है बहुत,
मैं खुश थी,चारों तरफ खुशियाँ थी बहुत,
मेरा चहकना, मेरा खिलखिलाना , 
कुछ मौज ,कुछ मस्तियाँ याद आते हैं बहुत,
सपने सुहाने मेरे नटखटपन के याद आते है बहुत,
सपने सुहाने मेरे बचपन के याद आते है बहुत।
कुछ शरारतें , कुछ समझदारिया,
कुछ चाहतों का ना बताना,
वो दादी की बातें ओर उनकी वो गुस्से में लाल आँखे ,
याद आती हैं बहुत, 
सपने सुहाने मेरे अल्हड़पन के याद आते हैं बहुत।
अब बड़े हो गए है यादे बचपन की कुछ सपनो सी लगती हैं,
याद आती हैं बहुत मुझे मेरी मनमर्जियाँ।
सपने सुहाने लड़खपन के,सपने सुहाने मेरे बचपन के
अब याद आते हैं बहुत, तड़पाते हैं बहुत।।



#लवलीन यदुवंशी।                                                           





 

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मै और मेरी कहानी

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हमारा मिलन

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